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चिकमगलूर में घूमने की जगहें – स्वादिष्ट कॉफी और सुंदर प्रकृति

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  • Post last modified:September 28, 2021
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सुबह के 4 बजे का समय, कुल्हड़ की कॉफ़ी, शीतल हवा और सामने पेड़ पर बैठे सफ़ेद परिंदो का झुंड। कुछ यूं स्वागत किया कर्नाटक के कॉफ़ी के शहर चिकमगलूर ने मेरा। ये मेरा सोलो ट्रिप था।

मन में ढेर सरे भाव उभर रहे थे, साँसों में एक सिरहन थी, बस की खिड़की वाली सीट पर बैठकर सोच रहा था कि अगले 3-4 दिन कैसे व्यतीत होंगे। मैंने बैंगलोर से रात की बस ली और चिकमगलूर को चल पड़ा। भोर होते ही मैं अपने गंतव्य को पहुंच  गया।


विषय सूची
  1. चिकमगलूर पहुंचना
  2. घूमने की जगहें
  3. चिकमगलूर में अन्य घूमने की जगहें
  4. क्या करें
  5. कुछ सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न
  6. कब जाएं
  7. कैसे पहुंचे
  8. मेरा अनुभव

चिकमगलूर पहुंचना

ज़रा सोचिए, एक नया शहर, नए लोग, नई भाषा, नई संस्कृति फिर भी एक अपनेपन का एहसास, यही तो है हमारे देश की ख़ूबसूरती और एकता, और ऊपर से अकेले यात्रा करना तो इस ट्रिप को और साहसिक बनाएगा। अगर सही मायनों में आप खुद को पाना चाहते है तो आपको एक सोलो ट्रिप अपने जीवन में जरूर करनी चाहिए।

उतरते हुए शीतल हवा के झोके ने मेरे चेहरे को स्पर्श किया। बस स्टॉप पर 2 घंटे के इंतजार के बाद मुझे अपने होटल जाने की बस मिली। चूंकि मेरा होटल शहर से 8 किमी दूर था, इकलौता साधन बस ही था। होटल के लोकेशन के बारे में आपको बताऊं, यह एक गांव के पास था जहां हर तरफ सिर्फ हरियाली ही थी।

थोड़ा थके होने के कारण उस दिन थोड़ा आराम करने और शाम में कुछ आस पास पैदल घूमने का विचार किया। मैं Zostel चिकमगलूर में ठहरा था।

घूमने की जगहें

हिरेकोलाले झील

अगले दिन सुबह तैयार हो के नाश्ता किया और रोड के किनारे बस का इंतजार करने लगा। बस का तो नामोनिशान तक नहीं था। सोचा लिफ्ट ही लिया जाए। एक नवयुवक ने मुझे लिफ्ट दी। उसने अपना नाम राहुल बताया। हमने थोड़ी गपशप की और उसने मुझे मुख्य शहर में छोड़ दिया। घूमते घामते मैं हीरेकोलाले झील पहुंचा। उसका नज़ारा शायद मैं आपको शब्दों में बयां ना कर पाऊं। मैं झट से किनारे गया, पैरों को पानी में डाल के विराजमान हो गया।

मैं किनारे पर बैठ कर शिव्या नाथ का उपन्यास द शूटिंग स्टार पढ़ रहा था, तभी मुझे किसी के पीछे से आने की आहट हुई। मुड़कर देखा तो एक बुजुर्ग हाथ में छड़ी लिए खड़े थे। उन्होंने कन्नड़ भाषा में कुछ बोला जो मेरी समझ में नहीं आया। मैंने उनको इशारा किया कि मुझे समझ नहीं आया। लेकिन फिर भी वो बहुत देर तक कुछ बताने की कोशिश करते रहे। मैं भी ध्यानपूर्वक उनकी बातें सुन रहा था। शायद वो इशारा कर रहे थे कि को गाएं चर रही है वो उनकी है, या पास के खेत उनके हैं। कुछ वक़्त बाद उन्होंने पानी मांगा। पानी पीने के बाद एक मुस्कुराहट देते  हुए वो चले गए। मैं फिर से अपने पैर पानी में डाल कर लेट गया। हल्की सी आंख भी लग गई। ऐसे कुछ घंटे बिताने के बाद वापस जाने को तैयार हुआ।

वापसी के लिए ऑटो नहीं मिल रहा था, तभी कुछ लड़कों का झुंड मेरे पास आया। थोड़ी दूर तक लिफ्ट मांगने पर पता चला कि एक लड़का शहर की ओर ही जा रहा था। मैं झट से उसकी मोटरसाईकिल पर बैठ गया। थोड़ी देर बातचीत करने पर मैंने पूछा कि भाई क्या करते हो। तो जवाब मिला कि मैं चोर हूं। ये सुनते ही मेरा हाथ अपनी जेब पर गया। कुशलतापूर्वक सब कुछ अपनी जगह पर था। उसने मुझे अपनी छोटी सी कहानी सुनाई कि कैसे- कैसे उसके जीवन में घटनाएं घटित हुई। 

मुझे प्यास लगी थी। ये जानकर उसने एक गन्ने के जूस के पास गाड़ी रोकी। पीने के बाद जैसे ही मैंने पैसे दिए तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोला ऐसे कैसे, आप हमारे शहर में है, मैं देगा। कुछ ही पल पर ऐसा जुड़ाव ही गया था कि आगे  कुछ दूर पर एक बेकरी शॉप थी, जहां उसकी मां काम करती थी। उसके मुझे उनसे मिलवाया। उन्होंने घर आने का निमंत्रण भी दिया। मैं बोला कि वक़्त मिला तो जरूर आऊंगा। फ़िर उसने मुझे बस स्टॉप छोड़ा, जहां दोपहर का भोजन कर के वापस होटल की ओर अग्रसर हुआ।

छन्नाकेश्वा मंदिर, बेलूर

अगले दिन सुबह जैसे ही मैं होटल गेट तक पहुंचा तो अचंभित रह गया। राहुल पहले से मेरा इंतजार कर रहा था। उसने मुस्कुराकर मेरा स्वागत किया और पूछा आज कहा जाने का है। मैं बोला कि आज बेलूर जाना है। बस स्टॉप से बस ली और बेलूर चल पड़ा। बेलूर वहां से 35 किमी की दूरी पर है।

छन्नाकेशवा मंदिर हासन जिले में बेलूर नामक जगह पर स्थित है। यह 1117 ईस्वी में राजा विष्णुवर्धन द्वारा बनवाया गया था। मंदिर को तीन पीढ़ियों में बनाया गया था और इसे खत्म करने में 103 साल लगे। इसे युद्धों में बार-बार क्षतिग्रस्त किया गया और लूटा गया। बार-बार इसकी मरम्मत भी की गई। यह चिकमगलूर शहर से 35 किमी और बेंगलुरु से लगभग 200 किमी दूर है।

यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। मंदिर परिसर में कुल 13 मंदिर है। इसको देखने पर द्रविड़ियन और विजयनगर वास्तुकला की झलक देखने को मिलती हैं। 

मुल्ल्यानगिरी की सैर

बाबा बुदानगिरी पर्वत श्रृंखला में स्थित मुल्ल्यानगिरी समुद्र तल से 1930 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह कर्नाटक की सबसे ऊंची चोटी है। मुख्य शहर से इसकी दूरी 10 किमी है। जगह अपने शांत माहौल, हरियाली और ट्रेकिंग के लिए प्रसिद्ध है। यहां एक शिव मंदिर भी है, जो इसकी सुंदरता में चार चांद लगाता है। ऊंचाई पर पहुंचकर आपको अत्यंत शांति और सुकून का अनुभव होगा। पहाड़ी के घुमावदार और जंगल रास्ते रोमांचक ट्रेल्स के लिए काफी प्रसिद्ध हैं।

ट्रेंकिग के अलावा आप यहां कैंपिंग, माउंटेन बाइकिंग और एक लंबी पैदल यात्रा का आनंद उठा सकते हैं।

बाबा बुदांगिरी चोटी

यह स्थान शहर से 12 किमी की दूरी पर है। संत हजरत दादा हयात खण्डलार उर्फ ​​बाबा बुडान को समर्पित यह जगह अपने मंदिर के लिए जानी जाती है। इस जगह को हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समान रूप से सम्मान देते हैं। चिकमगलूर ही वह शहर है जहां भारत में सबसे पहले कॉफ़ी उगाई गई थी। माना जाता है कि 1670 ईस्वी में इस जगह पर सूफी बाबा बुडान ने कॉफी की फसल उगाई थी|

नीलकुरिंजी के अद्वितीय फूलों की प्रजाति भी इन्ही पहाड़ियों पर हर बारह साल में एक बार खिलती है जो इस जगह का एक प्रमुख आकर्षण है| बाबा बुडांगिरी हिल्स घने जंगलों के लिए भी प्रसिद्ध हैं। इन पहाड़ियों में लंबी पैदल यात्रा और ट्रेकिंग की जा सकती हैं।

भद्रा वन्यजीव अभयारण्य

490 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ भद्रा वन्यजीव अभयारण्य  चिकमंगलूर शहर से केवल 38 किमी पश्चिम में स्थित है। हर तरफ पश्चिमी घाट की पहाड़ियों से घिरा, भद्रा वन्यजीव अभयारण्य का दृश्य किसी फिल्म के  दृश्य जैसा लगता है! दूर-दूर तक फैले पहाड़, जैसे बर्फ से ढकी चोटियाँ आसमान को भेदती हैं। पहाड़ों की ऊंची चोटियां कुछ यूं प्रतीत होती है जैसे वन्यजीव अभयारण्य ने मुकुट धारण किया हो।

चिकमगलूर का भद्रा वन्यजीव अभयारण्य
भद्रा वन्यजीव अभयारण्य
  • यहां जंगल सफारी का अनुभव जरूर करें।
  • सुबह 6-8 बजे और शाम को 4-6 बजे सफारी का आदर्श समय है।
  • सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यहां बाघों की संख्या 33 है
  • भद्रा नदी अभ्यारण्य के बीच से गुजरती है, तो आप प्राकृतिक नज़ारे का अंदाज़ा लगा सकते है।

कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान

चिकमगलूर से 60 किमी की दूरी पर स्थित इस उद्यान की सैर करना बिल्कुल ना भूलें। यह अपने प्राकृतिक खजानों में पहाड़, प्राचीन झरने और हरे-भरे परिदृश्य के लिए काफी प्रसिद्ध है। अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं तो यह स्थान आपके लिए सबसे खास है। यहां आपको प्रकृति के करीब जाने का भरपूर मौका मिलेगा जहां आप एक यादगार पल बिता सकते हैं।

 चिकमगलूर का कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान
 कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान

 कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान 600 किलोमीटर लम्बा है। इस क्षेत्र की कई चोटियों पर वनस्पतियों और जीवों की विविध प्रजातियां प्रचुर मात्र में पायी जाती हैं| उद्यान से सम्बन्धित कुछ महत्वपर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं –

  • पार्क में स्थित सबसे ऊंची चोटी से कुद्रमुख को इसका नाम मिला है|
  • यह छोटी किसी विशेष कोण से घोड़े के चेहरे की तरह दिखती है|
  • इस छोटी की ऊंचाई 6,214 फीट है और कर्नाटक में दूसरा सबसे ऊंचा शिखर है
  • उद्यान में बाघों, जंगली कुत्तों जैसे लुप्तप्राय जानवरों का निवास है।
  • यहां आप ट्रेकिंग का अनुभव भी कर सकते हैं।
  • खुलने का समय: 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक।

कोदंड रामास्वामी मंदिर

चिकमगलूर जिले से 5 किलोमीटर की दूरी पर हिरेमगलुर में स्थित कोदण्ड राम मंदिर होयसला के काल में बनी एक प्राचीन मंदिर का नमूना है। मंदिर का केंद्रीय ढांचा द्रविड़ियन शैली में बनाया गया है, शेष भाग विजयनगर के शासकों द्वारा बनवाया गया था। नवग्रहों को 14 वीं शताब्दी में और मुख्य मंडप को 16 वीं शताब्दी ं बनवाया गया था। इस मंदिर में कोदंड राम, सीता और लक्ष्मण के चित्रों की पूजा की जाती है। स्थलपुराण के अनुसार, सीता और लक्ष्मण के साथ राम जी ने इस पवित्र स्थान पर परशुराम जी को दर्शन दिए थे।

मेरी मुलाकात यहां पर एक अनोखे इंसान से हुई, जिनका नाम हिरेमागालूरू कन्नन था। इन्होंने मुझे भोजन कराया और बहुत सी अच्छी बाते बताई। ये कर्नाटक के जानी – मानी हस्तियों में से एक हैं। इतना प्रसिद्ध होने के बावजूद एक सामान्य जीवन व्यतीत करते है। ये देखकर मैं बहुत प्रभावित हुआ। हमने बहुत सी धार्मिक और सांस्कृतिक बातें साझा की। उनसे बहुत सी बातें सीखने को मिलीं।

हिरेमागालुरू कन्नन जी एक साहित्यकार, पुजारी, लेखक, टेलीविजन व्यक्तित्व और रेडियो जॉकी हैं। वह एफएम रेडियो स्टेशन ‘नामम’ रेडियो में ‘कॉफ़ी विद कन्नन ′ के कार्यक्रम से जुड़े हैं, जिसके दुनिया भर में 400,000 श्रोता हैं। इन्होंने एक किताब “नूदी पूजे” लिखी हैं जो कन्नड़ भाषा में है। इन्होंने अपने जीवन में अभी तक बहुत से देशों का भ्रमण किया है।

चिकमगलूर में अन्य घूमने की जगहें

श्रृंगेरी शारदा पीठ

श्री आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित किया गया इस पवित्र मंदिर का नाम प्रसिद्ध ऋषि श्रृंगी के नाम पर रखा गया था। ये वही ऋषि है जिन्होंने सतयुग में राजा परीक्षित को किसी कारणवश श्राप दिया था। यह स्थान शहर से 57 किमी की दूरी पर है।

कॉफ़ी संग्रहालय की सैर

इस संग्रहालय कॉफ़ी की ऐतिासिक यात्रा की पूरी कहानी बयां करता है। साथ ही आप यहां कॉफ़ी बनाने की पूरी प्रक्रिया देख सकते है। इस स्थान की दूरी शहर से 5 किमी है।यह संग्रहालय ‘कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया’ द्वारा संचालित है।

केमानगुडी

चिकमगलूर का केमानगुडी
 केमानगुडी

 केमानगुडी चिक्कमगलुरु से कुछ दूर स्थित  एक हिल स्टेशन है। यह समुद्र तल से 1434 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां राजा कृष्णराज वोडेयार चतुर्थ गर्मी से निजात पाने के लिए घूमने आते थे और  राजा के सम्मान के रूप में, इसे श्री कृष्णराजेंद्र हिल स्टेशन के रूप में भी जाना जाता है। यह स्थान भी हर प्रकार से प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है।

हेब्बे जलप्रपात

हेब्बे जलप्रपात
हेब्बे जलप्रपात

केमानगुडी की पहाड़ियों में बसा यह जलप्रपात प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगाता है। लगभग 180 मीटर से गिरता हुआ पानी की धारा आपको मंत्रमुग्ध कर देगी। यहाँ का शीतल वातावरण, ठंडी हवा, दूर तक फैली शांति किसी को भी घायल करने के लिए काफी है।

क्या करें

  • कॉफ़ी बागानों की सैर जरूर करें, मुमकिन हो तो होमस्टे भी बागानों के बीच में ले।
  • इस प्राकृतिक सुंदरता में ट्रेकिंग और कैंपिंग करना सबसे अच्छा रहेगा।
  • बेलवाड़ी में वीरा नारायण मंदिर की यात्रा करें|
  • चिकमगलूर से 40 कि.मी दूर कलहट्टी फॉल्स में मज़ा करें|
  • कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान में कदंबी फॉल्स का आनंद लें।
  • यहां से कॉफ़ी ले जाना बिल्कुल ना भूले।
  • बस स्टॉप के सामने एम जी रोड शहर का मुख्य बाजार है। यहां खरीददारी कर सकते है।

कुछ सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न

चिकमगलूर जाने का सही समय क्या है?

वैसे तो चिकमगलूर सालभर जय जा सकता है, पर सर्दी और बरसात के मौसम में इसका निखार और भी अधिक हो जाता है।

मुल्ल्यानगिरी चोटी पर पहुंचने के क्या विकल्प है?

आप अपने खुद के वाहन के साथ साथ , टैक्सी बुक कर सकते है। ट्रेक्किंग भी अच्छा विकल्प है।

क्या सबसे पहले कॉफी यहीं पर उगाई गई थी?

चिकमगलूर ही वह शहर है जहां भारत में सबसे पहले कॉफ़ी उगाई गई थी। माना जाता है कि 1670 ईस्वी में इस जगह पर सूफी बाबा बुडान ने कॉफी की फसल उगाई थी|

चिकमगलूर में कहां रुकना सबसे कारीगर होगा?

यूं तो बहुत से होटल और हॉस्टल यहां उपलब्ध है, पर आप सही में वादियों का मज़ा लेना चाहते है, तो कॉफी एस्टेट में आवास लें। वो एक अलग ही अनुभव होगा।

बंगलौर से चिकमगलूर पहुंचने का तरीका क्या है?

बंगलौर सबसे निकटतम हवाई अड्डा है, वहां से लगातार अंतराल पर बसें संचालित है।

कब जाएं

वैसे तो चिकमगलूर साल भर जाया जा सकता है, परन्तु अगर आप सच्चे प्रकृति प्रेमी है तो सर्दी और बरसात का मौसम सबसे अनुकूल रहेगा। इस वक़्त इसकी सुंदरता में अद्भुत सा निखार आता है।

कैसे पहुंचे

सड़क मार्ग द्वारा

सबसे सुगम यात्रा सड़क मार्ग से किया जा सकता है। बंगलौर और मैसूर से राज्य परिवहन की बसे आसानी से मिल जाती हैं।

रेल मार्ग द्वारा

 निकटतम रेलवे स्टेशन बंगलौर ( 244 किमी), मैसूर (172 किमी) , हासन ( 61 किमी) है। बंगलौर और मैसूर देश के विभिन्न शहरों से जुड़े हुए है।

हवाई मार्ग द्वारा  

आप बंगलौर या मैंगलोर हवाई अड्डे से यहां पहुंच सकते है। हवाई अड्डे से बस या कैब के माध्यम से चिकमगलूर पहुंचा जा सकता है।


मेरा अनुभव

इस छोटी सी यात्रा के दौरान मैं सभी जगहों का भ्रमण नहीं कर सका। पर इसका तनिक भी मलाल नहीं है, क्योंकि जितना भी घूमा उतना मेरे जहन में सम्पूर्ण जीवन भर तक सुरक्षित है।

इतना कुछ अनुभव मैंने किसी यात्रा में नहीं किया जितना चिकमगलूर में किया, शायद इसीलिए सोलो ट्रिप करने की सलाह दी जाती है।

आप भी कभी निकालिए कुछ वक़्त अपने व्यस्त जीवन से और कुछ पल बिताइए प्रकृति की हसीन वादियों में।

उम्मीद है यह लेख आपको अपने चिकमगलूर की यात्रा में थोड़ा मददगार साबित होगा। फिर भी आप कोई सवाल पूछना या सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे टिप्पणी बॉक्स में अपने विचार हमसे साझा करें।


Abhishek Singh

मैं अभिषेक सिंह नवाबों के शहर लखनऊ से हूं। मैं एक कंटेंट राइटर के साथ-साथ डिजिटल मार्केटर भी हूं | मुझे खाना उतना ही पसंद है जितना मुझे यात्रा करना पसंद है। वर्तमान में, मैं अपने देश, भारत की विविध संस्कृति और विरासत की खोज कर रहा हूं। अपने खाली समय में, मैं नेटफ्लिक्स देखता हूं, किताबें पढ़ता हूं, कविताएं लिखता हूं, और खाना बनाता हूँ। मैं अपने यात्रा ब्लॉग मिसफिट वांडरर्स में अपने अनुभवों और सीखों को साझा करता हूं।

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