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कुर्ग – कर्नाटक की गोद में बसा मनोरम हिल स्टेशन

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  • Post last modified:September 28, 2021
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मनमोहक घाटियां, ऊंची ऊंची चोटियां, कल – कल करती नदियां और गगन से बरसता अमृत अर्थात बारिश! इन सब आभूषणों से अलंकृत है कर्नाटक में बसा छोटा सा हिल स्टेशन – कुर्ग। यूं ही नहीं इसे दक्षिण भारत का कश्मीर कहा जाता है। और तो और कुछ लोग इसे भारत का स्कॉटलैंड भी कहते है।

मैंने जब कुर्ग जाने का विचार बनाया तो मन में एक उत्सुकता थी क्योंकि चित्रों ने पहले ही मरे ऊपर जादू चला रखा था। इस स्थान की हरियाली के चर्चे पुरे देश भर में को जाती है इसलिए अगर आप प्रकृति प्रेमी है तो यह जगह आपको तनिक भी निराश नहीं करेगा। तो चलिए ले चलते है आपको कुदरत की करिश्माई सैर पर।


कुर्ग केप्रमुख पर्यटन स्थल

कुर्ग या कोडागु एक छोटा सा जिला है जिसका मुख्यालय मदिकेरी है। 80% पर्यटन स्थल मदिकेरी में है और 20% कुशलनगर में। मेरे साथ मेरे मित्र शेखर और तान्या थे। हम कुशलनगर में काउचसर्फिंग किए हुए थे, इसलिए पहले दिन हमने वहां के आस-पास भ्रमण करने की योजना बनाई।

हमारा पहला पड़ाव नामड्रोलिंग मथ, बायालकुप्पे था। बस स्टॉप से एक ऑटो किया और 15 मिनट का सफर तय करने के बाद हम मोनेस्ट्री पहुंच गए।

नामद्रोलिंग मठ, बयालकुप्पे 

बयालकुप्पे को दक्षिण भारत का तिब्बत भी कहा जाता है। उत्तर भारत में धर्मशाला और दक्षिण भारत में बायालकुप्पे में तिब्बतियों की मुख्य बस्तियां है। देश के अलग-अलग हिस्से से बौद्ध अनुयायी यहां धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते है। यहां का शांतिमय और आध्यात्मिक वातावरण ने हमारी यात्रा की शुरुआत के लिए संजीवनी का काम किया। 

हमने पहले मुख्य मंदिर में प्रवेश किया जहां पर भगवान बुद्ध की आलीशान प्रतिमा सुसज्जित थी। दर्शन के पश्चात् कुछ देर वहीं बैठना उचित लगा। एक अद्भुत सी शांति का अनुभव हो रहा था। मैं उस वातावरण में जैसे घुल सा गया था।  काफी संख्या में पर्यटक यहाँ आये थे। पता नहीं ऐसी शांति और आध्यात्मिक वाली जगहें मुझे इतना क्यों आकर्षित करती हैं। खैर थोड़ा वक़्त बिताने के बाद हम परिसर भ्रमण करने की ओर अग्रसर हुए।

एक बौद्ध अनुयायी से हमने उनकी दैनिक दिनचर्या के बारे में पूछा तो उन्होंने बड़ी विनम्रता से हमे सारी चीज़े बताई। बात करने  बाद हम आगे बढ़े। वहां से आगे कुछ डोर पर एक छोटा सा झील है जो बहुत ही कम लोगों द्वारा घूमा जाता है। मैंने झील के पास जाना उचित समझा। पेट में चूहों का दौड़ना भी शुरू हो गया था। वापस बस स्टॉप आकर दोपहर का खाना खाया और अगले स्थल की ओर बढ़ने लगे।

निसारगाधाम

निसारगाधाम एक लुभावनी और सुंदर द्वीप है जो कुशालनगर शहर से 2 किमी की दूरी पर स्थित है। यह शानदार द्वीप 64 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। वन विभाग द्वारा 1989 में एक पर्यटक स्थल के रूप में स्थापित, सुरम्य पिकनिक स्थल सुंदर बांस के पेड़ों के झुरमुटों के साथ घने बांस के पेड़ों और चंदन के रसीले पत्थरों से सुशोभित है।

Nisargadhama

यह कहना किसी भी तरह से अतिश्योक्ति नहीं होगी कि निसारगाधाम वास्तव में सभी प्रकृति प्रेमियों के लिए पृथ्वी पर एक स्वर्ग है। वास्तव में, निसारगाधाम पर्यटकों और आगंतुकों के लिए एक आदर्श स्थान है, जो अपने प्रियजनों के साथ प्रकृति की गोद में शांति से कुछ पल बिताना चाहते हैं। 

निसारगाधाम की प्राकृतिक सुंदरता इसे कूर्ग की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक बनाती है और यह एक प्रसिद्ध पिकनिक स्थल है, न केवल कुर्ग के लोगों के लिए, बल्कि पूरे देश के पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी।

Nisargadhama Village Culture

द्वीप को एक लटकते रस्सी के पुल के माध्यम से पहुँचा जा सकता है। हिरण, खरगोश और मोर सहित जानवरों का एक झुंड प्राचीन परिवेश में यहाँ रहता है। इसके अलावा, जगह में एक छोटा स्नैक हाउस और एक हिरण पार्क भी है।

पर्यटकों को नदी के किनारे कुछ उथले और सुरक्षित स्थानों पर पानी में उतरने की अनुमति है। हाथी की सवारी और नौका विहार यहां के कुछ अन्य लोकप्रिय आकर्षण हैं। निसारगधामा में एक वन विभाग द्वारा संचालित गेस्ट हाउस और ट्रीटोप बांस के कॉटेज हैं।

निसारगाधाम में हमने बहुत अच्छा वक़्त बिताया चाहे वो हिरण को घास खिलाना हो या नदी तट पर बैठना। अब सूरज ढल रहा था। हमने वापस जाने का निश्चय किया। यहां पर चॉकलेट की बहुत सी दुकान है, जहां भिन्न भिन्न प्रकार की चॉकलेट आपको मिल जाएंगी। 

कुर्ग (मदिकेरी) के लिए प्रस्थान

अगले दिन हम सुबह जल्दी उठें। अपना नाश्ता किया और बस स्टॉप की ओर तेजी से बढ़े। पता चला कि बस 20 मिनट बाद आएगी। किसी तरह बस में सीट लिए और चल पड़े कुछ और कुदरत का करिश्मा देखने। मदिकेरी कुशलनगर से एक घंटे का रास्ता है। वहां पहुंचकर सबसे पहले एब्बे वॉटरफॉल जाने का प्लान बना। 

एब्बे वॉटरफॉल

मदिकेरी से एब्बे वॉटरफॉल की दूरी 8 किमी है। हमने एक ऑटो लिए और वहां पहुंचने को आतुर हुए। यह वॉटरफॉल कॉफी के सुंदर बागानों से चारों तरफ से घिरा है। आपको वॉटरफॉल तक पहुंचने के लिए लंबी सीढ़ियां उतारनी पड़ेगी। लेकिन उसके बाद जो प्राकृतिक नज़ारा आपको दिखेगा वो आपकी सारी थकान छू मंतर कर देगा। 

Abbey Falls Madkeri

एब्बे वॉटरफॉल को पहले जेस्सी वॉटरफॉल के नाम से जाना जाता था। जेस्सी एक अंग्रेज़ अधिकारी की पत्नी थी। बाद में इसका नाम एब्बे पड़ा। कुछ वक़्त निहारने के बाद हम वापस आने को तैयार हुए। यहां बरसात के मौसम में वॉटरफॉल अपने रौद्र रूप में होता है।

राजाओं के मकबरे

मुख्य शहर से एक किमी दूर राजाओं के मकबरे पहाड़ी क्षेत्र के किनारे पर बने ऐतिहासिक स्मारक हैं, जो इंडो-दर्शनीय शैली में निर्मित है। दाहिनी ओर दो मुख्य मकबरे हैं। लिंगराजेंद्र का निर्माण उनके पुत्र चिक्कविराजेंद्र ने ए डी 1820 में किया था और रुद्रप्पा (शाही पुजारी) की कब्र के बाईं ओर जो 1834 में बनाया गया था और केंद्र मकबरा डोड्डा वीराराजेन्द्र और उनकी रानी का है। 

Raja's Tombs (Gaddige)

यहां ऊंचाई से आप पूरा मदिकेरी शहर देख सकते है। आपको बहुत सारी फ़ोटो खींचने के लिए मनमोहक दृश्य मिल जाएंगे।

Sighseeing Near Raja's Tombs (Gaddige)

मदिकेरी किला और संग्रहालय

बस स्टॉप से सिर्फ 700-800 मीटर की दूरी पर स्थित है मदिकेरी का किला। किला बहुत भव्य नहीं है पर उस वक़्त के इतिहास का बखूबी बयां करता है। अब इस इमारत को सरकारी कार्यालय के लिए प्रयोग किया जाता है।

Madikeri Museum

इसके ठीक सामने एक संग्रहालय है जहां आपको कोडवा संस्कृति की झलक देखने को मिल जाएगी। खुदाई में प्राप्त सारी चीज़े यहां संग्रहित है।

राजा की सीट

मदिकेरी किले से कुछ दूर पैदल चलने पर आप राजा की सीट तक पहुंच जाएंगे। यह वाकई में एक अद्भुत जगह है। यहां आप पर्वत श्रृंखलाएं, सूर्योदय, सूर्यास्त और कॉफी के बागानों को एक ऊंचाई सें देखने का सौभाग्य प्राप्त कर सकते हैं। 

बच्चों और परिवार के साथ समय बिताने के लिए इसको एक पार्क का रूप दिया गया है। कहा जाता है कि यह कुर्ग के राजा सूर्यास्त देखने अपनी रानियों के साथ आते थे। हम भी सूर्यास्त को निहारने के लिए बैठ गए। 

ओंकारेश्वर मंदिर 

मदिकेरी में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर को 1820 में राजा लिंगराजेंद्र द्वितीय ने तपस्या के रूप में बनवाया था। मंदिर वास्तुकला के मुहम्मदन शैली में बनाया गया है, जिसमें एक गुंबद है। इसके चार कोने चारों बुर्जों से घिरे हैं।

omkareshwara temple

मंदिर के प्रवेश द्वार के पास एक लिंग स्थापित है। मंदिर की एक और आकर्षक वास्तुशिल्प विशेषता और सामने एक छोटा सा तालाब है, जिसमें विभिन्न प्रकार की मछलियां है।

अन्य पर्यटन स्थल

  • मंडलपट्टी की जीप सफारी – मदिकेरी से 25 किमी दूरी पर स्थित है मंडलपट्टी, जहां पहुंचने के लिए आपको पुष्पगिरी के घने जंगलों से गुजरना होगा। बारिश के मौसम में ताज़ा नहाए घास और हवा के झोकों के साथ झूमते जंगली फूलों से इसकी सुंदरता दोगुनी हो जाती है।
  • दुबारे हाथी कैंप – यहां आप हाथियों को नहाते – खेलते देख सकते है और अगर आप चाहे तो हाथियों को नहला भी सकते है।
  • तलकावेरी – कुर्ग से इसकी दूरी 40 किमी है। यह वह स्थान है जहां से कावेरी नदी की उत्पत्ति हुई है। कावेरी नदी सप्त सिंधु नदियों में से एक पवित्र नदी है।

कुर्गी स्वाद का मज़ा 

मदिकेरी का ‘कुर्गी’ रेसटोरेंट में खाने के लिए लंबी कतारें लगती है। आपको टोकन नंबर मिलेगा। आपका नंबर आने पर आपको सीट मिलेगी। एक और जगह है ‘ उडुपी गार्डन ‘ जहां आप खाना खा सकते है।

Coorg Cuisine

स्थानीय पकवान – कड़ांबुट, नुपुट, पंदी करी, कोडवा कोला करी, बैंबू शूट करी, अक्की ओटी आदि आप खा सकते हैं।

कोडवा जाति और संस्कृति की झलक

यहां के लोग कोडवा नामक आदिवासी जनजाति के है। इनका संबंध सिंधु घाटी सभ्यता के शहर मोहनजोदड़ो से है। स्कन्द पुराण में कोडवा को चंद्रवंशी राजाओं का वंशज बताया गया है, जो पार्वती के पूजक और कावेरी नदी के जन्मस्थल के रक्षक थे। 

यह शहर 8वीं सदी में बसा था। यहां सबसे पहले गंग वंस के शासकों ने राज किया। बाद में पांडव, चोल, कदंब और चालुक्य वंश के राजाओं का शासन था। आज भी आपको यहाँ कोडवा संस्कृति की झलक देखने को मिल जाएगी। 

चॉकलेट और कॉफी प्रेमियों का स्वर्ग

चॉकलेट का सबसे ज्यादा उत्पादन कुर्ग में होता है। आप यहां से तरह – तरह के चॉकलेट और घर की बनी कॉफी खरीदना ना भूलें। बस स्टॉप के पास “ गणेश कॉफी “ नामक दुकान है जो शहर में बेहतरीन कॉफी के विक्रेता है।

Ganesh Coffee Madikeri

लौंग, इलायची, काली मिर्च जैसे मसाले भी आपको जरूर घर ले जाना चाहिए। यहां का  होम मेड वाइन भी प्रसिद्ध है। मैंने तो ढेर चॉकलेट खरीदी और कॉफ़ी भी लिया। सच कहूं तो ऐसी स्वादिष्ट और बिना किसी मिलावट वाली प्योर चॉकलेट पहली बार चखा। 

कब और कैसे जाएं

वैसे तो सालभर यह जगह पर्यटकों को आकर्षित करता है, लेकिन अगर आप बरसात के मौसम में जाए तो इसकी सुंदरता को चार चांद लग जाते है। छतरी और रेनकोट रखना बिल्कुल ना भूलें।

कुर्ग, बैंगलोर से 260 किमी और मैसूर से 120 किमी की दूरी पर स्थित है। नजदीकी हवाई अड्डा बैंगलोर और रेलवे स्टेशन मैसूर है। आगे की यात्रा बस, कार या बाइक के माध्यम से की जा सकती है।

कुछ मुख्य बिन्दु

  • कुर्ग को “ कर्नाटक का कश्मीर “ भी बोलते है।
  • कॉफी और मसालों के बागानों का सैर करना भी एक अच्छा विकल्प है।
  • कॉफी बागानों के सैर की ऑनलाइन बुकिंग भी होती है
  • कम से कम 3-4 दिन अवश्य बिताएं
  • प्राकृतिक सुंदरता को मन से महसूस करें।
  • होटलों के बजाय होमस्टे या कॉफी बागानों के आस पास रुके।

कुछ सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न

कुर्ग पहुंचने का आसान तरीका क्या है?

बंगलौर हवाई अड्डा कुर्ग का निकटतम हवाई अड्डा है। वहां से आप बस के माध्यम से पहुंच सकते हैं। रोड की स्थिति अच्छी होने के कारण आप अपने निजी वाहन से भी जा सकते हैं।

कुर्ग में क्या करें?

सबसे मुख्य काम यह करें की कॉफी बागानों की सैर करें। कॉफी बनने की विधि देखे और संभव हो तो कॉफी एस्टेट में ही रुकने की योजना बनाएं। इसके अलावा चॉकलेट और कॉफी खरीदें, साथ ही प्रकृति की गोद में आराम करें।

कुर्ग जाने का अच्छा समय क्या है?

सर्दी और बरसात के मौसम आदर्श माने जाते हैं। इस समय कुर्ग की खूबसूरती और निखार के आती है। और हां गर्मी में जाने से परहेज़ करें।

कुर्ग को और किस नाम से जाना जाता है?

कुर्ग या कोगाडू कर्नाटक राज्य में एक जिला है, जिसका मुख्यालय मदिकेरी है। मुख्यता सभी पर्यटन स्थल मदिकेरी के आसपास ही हैं।


मेरा अनुभव

प्रकृति के करीब रहना हमेशा से सुखदायी और आनंदमय होता है। सच कहूं तो यह यात्रा एक शानदार यात्रा रही जहाँ ना सिर्फ प्रकृति के करीब रहा बल्कि नयी संस्कृति देखी और नए-नए लोगो से मिला। अगर आप कभी इस प्राकृतिक सुंदरता को निहारने का विचार बनाए और मन में कोई भी सवाल हो, हमसे बेझिझक पूछे।


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Abhishek Singh

मैं अभिषेक सिंह नवाबों के शहर लखनऊ से हूं। मैं एक यात्रा लेखक और शायर हूं। विज्ञान वर्ग में स्नातक होने के साथ-साथ डिजिटल मार्केटर भी हूं | स्वाद के मामले में मेरा कोई जवाब नहीं। खाने के साथ मुझको घूमने का बहुत शौक है।अपने हिसाब से ज़िन्दगी जीने की हर कीमत चुकाने को हमेशा तैयार रहता हूं। मेरे हिसाब से अगर आप अपने सपनो को दबा देते है तो आप वास्तव में एक निर्जीव के सिवा कुछ नहीं है | मैं बिना किसी की परवाह किये अपने सपनो को पूरा करने की राह पर चल पड़ा हूं।

This Post Has 14 Comments

  1. Priya singh

    Amazing blog..
    So informative

    1. Abhishek Singh

      Thank you so much Priya. Keep your blessings like this always..!!

  2. Tanya sharma

    आपकी विचारों को व्यक्त करने की शैली सराहनीय है। उम्मीद है ऐसी ही अन्य जगहों से आप हमें रूबरू कराएँगे।

    1. Abhishek Singh

      आपको ब्लॉग पसंद आया, मतलब मेरी मेहनत सफल हुई। बिल्कुल हम मिल के हर एक जगह से रूबरू होंगे। अपनी कृपा बनाए रखिए।

  3. Sonali

    Very nice place and pretty well presented blog. Now I really wish to visit it soon..
    Keep up the good work..👍

  4. Sujeet Kumar Singh

    Nice blog ….. babu. Keep it up👍👍👍

    1. Abhishek Singh

      Thank you so much chachu. Keep your blessings on me like this always.

  5. Suyash

    Very helpful. I’m planning to go to Coorg. 😉👍👍

    1. Abhishek Singh

      Thanks buddy. You should visit. I was just amazed and it was one of my best trips..!!😊😊🤟

  6. Zehra

    Very nice…great going!

  7. Satendra mishra

    अति सुन्दर वर्णन

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