ला मार्टिनियर कॉलेज – लखनऊ में एक आकर्षक इंडो-फ्रेंच स्थापत्य कला

कुछ लोग इसकी अद्भुत संरचना के दीवाने है जबकि अन्य कहते हैं कि यह कला का एक सुंदर नमूना है। कुछ इसे लखनऊ की ऐतिहासिक विरासत के रूप में सुझाते हैं, जबकि कुछ इसके जटिल फ्रेंच वास्तुकला को देखने के बाद प्रशंसा की बौछार करते हैं। हम उन सभी से सहमत हैं, जिनकी राय हमसे मिलती है। इतिहास और वास्तुकला प्रेमियों को इस जगह का एक बार जरूर भ्रमण करना चाहिए। यह ला मार्टिनियर कॉलेज है जो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के तट पर स्थित भारत के सबसे सम्मानित स्कूलों में से एक है। यह स्कूल फ्रांस के एक शख्शियत मेजर जनरल क्लाउड मार्टिन को समर्पित है।


पूरी वीडियो यहां देखें

कौन है क्लाउड मार्टिन

क्लाउड मार्टिन फ्रांस के रहने वाले थे, जो फ्रेंच कंपनी के साथ भारत आए। जब पांडिचेरी के अंग्रेजी हुकूमत थोड़ी मजबूत दिखी और फ्रेंच कंपनी विनाश के कगार पर दिखी तब उन्होंने ईस्ट इंडिया कम्पनी में शामिल होना मुनासिब समझा। अंग्रेज़ी शासन ने इनको लखनऊ भेजा। उस समय लखनऊ के नवाब असफ उद दौला थे। 

धीरे धीरे मार्टिन, नवाब साहब के करीबी बन गए, और एक समय ऐसा आया कि दोनों की मित्रता इतनी गहरी हो गई कि अपने छोटे से छोटे राज भी एक दूसरे से साझा करने लगे। 

ला मार्टीनियर बनने की असली वजह

चूंकि ये नवाब साहब के बहुत खास थे, इनको हर प्रकार की सुख सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती थी। नवाब साहब की सेवा करते हुए उन्होंने अपार दौलत कमाई और उस वक़्त के सबसे अमीर फ्रेंच व्यक्ति बन गए।

क्लाउड मार्टिन ने इसका निर्माण खुद के आवास के रूप में कराया था। क्लाउड मार्टिन आजीवन अविवहित रहे। अतः उनकी मृत्यु के बाद कोर्ट में कुछ दिन तक इसपर सुनवाई हुई कि इसका वारिस कौन है। अंततः यहां कॉलेज बनाने पर फैसला लिया गया और यहीं उनकी अंतिम इच्छा भी थी।

कॉन्स्टेंटिया और मार्टिन की आखिरी इच्छा

आज का ला मार्टिनियर बॉय का कॉलेज प्रसिद्ध, धनी फ्रेंचमैन क्लाउड मार्टिन का ग्रीष्मकालीन महल था, लेकिन यहां निवास करने से पहले उन्होंने अंतिम सांस ले ली। ला मार्टिनियर कॉलेज 350 एकड़ में फैले कॉन्स्टेंटिया में मौजूद है। जिसके मध्य भाग पर कला के इस अद्भुत नमूना स्थापित है, जबकि कॉन्स्टेंटिया का हिस्सा लखनऊ गोल्फ क्लब द्वारा उपयोग किया जाता है।

ला मार्टिनियर कॉलेज
ला मार्टिनियर कॉलेज

क्लाउड मार्टिन की अंतिम इच्छाओं में से एक कॉन्स्टैंटिया को एक शैक्षिक संस्थान में बदलना था। इसलिए, 13 सितंबर 1800 के बाद, जब मार्टिन की मृत्यु हो गई, ला मार्टिनियर कॉलेज अस्तित्व में आया, हालांकि वर्ष 1845 में स्थापित किया गया था। आज इसमें 3000 से अधिक लड़के अध्ययन करते हैं और यहां हॉस्टल का भी प्रबंध है। इसका एक अलग कॉलेज भी है जो केवल लड़कियों के लिए है (शहर के केंद्र में स्थित है, जो कॉन्स्टेंटिया से कुछ किमी दूर है)।

रॉयल बैटल ऑनर ( शाही युद्ध सम्मान) पाने वाला एकमात्र कॉलेज

सन् 1857 की क्रांति के समय इस इमारत को अंग्रेजी हुकूमत द्वारा मुख्यालय के रूप में प्रयोग किया गया। यह के विद्यार्थी संदेश पहुंचाने और घायलों की मदद का काम किया करते थे। क्रांति के बाद कुछ समय के लिए स्कूल को बनारस स्थानांतरित किया गया। 

सन् 1859 में फिर से इमारत को दुरुस्त किया गया और फिर से स्कूल अपने कार्यशैली में लौट आया। क्रांति के दौरान अपने साहसिक योगदान के लिए यह बहुत प्रसिद्ध हुआ और इसको रॉयल बैटल ऑनर से सम्मानित किया गया।

आप यहां क्या कर सकते हैं?

सबसे पहले तो ये की इस इमारत को ” फ्रेंच वास्तुकला की सबसे ज्यादा संरक्षित इमारत ” बोला जाता है। इस बात से ही आप अंदाजा लगा सकते है इसकी भव्यता और सुंदरता के बारे में। यहां आप वाइड एंगल से पूरे भवन कि सुंदर तस्वीर ले सकते है। आपको एक वक़्त के लिए लगेगा की आप फ्रांस के किसी शहर में घूम रहे है।

बौलोन लिसे की कब्रगाह

जैसे ही आप मुख्य द्वार से प्रवेश करेंगे, आपकी निगाह सबसे पहले हरे रंग से चमचमाते हुए एक छोटे से गुंबदाकार वाले इमारत पर पड़ेगी। यह आकर्षक कब्र बौलोने लिसे की है, जो नवाब फजल खान बहादुर की पुत्री थी और क्लाउड मार्टिन की अच्छी दोस्त थीं। इन्हें लोग ‘ गोरी बीबी ‘ कहकर बुलाते थे। यह इस नाम से भी प्रसिद्ध हुईं। 

बौलोन लिसे की कब्रगाह

स्टोबार्ट हॉल

इस कैंपस की स्थापना सन् 2016 में हुई। इसका मुख्य उद्देश्य फ्रेंच भाषा सीखाना है। यहां रेगुलर और पार्टटाइम फ्रेंच भाषा की शिक्षा प्रदान की जाती है।

स्टोबार्ट हॉल

मनमोहक वास्तुकला

मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि जब आप इस इमारत से रूबरू होंगे आप इसकी भव्यता और स्थापत्य के मुरीद हो जाएंगे।

यह फ्रेंच वास्तुकला का अच्छा नमूना है। इसके ऊपर की आकृतियां यूनानी स्थापत्य कला का प्रदर्शन करती हैं। इसकी ऊपरी आकृतियां ही वास्तव में आकर्षण का केन्द्र है। आपको एक वक़्त के लिए लगेगा की आप यूरोप के किसी शहर में हैं। 

कॉलेज का उपरी हिस्सा

मेजर जनरल क्लाउड मार्टिन की कब्रगाह

जैसे आपके कदम उन सीढ़ियों पर पड़ेगी जो सीधा इमारत के अंदर जाती हैं, आप हर सीधी पर एक नाम उकेरा हुआ पाएंगे। यह नाम उन सैनिकों के है, जिन्होंने इस समय अपने जान पर खेलकर इमारत की सुरक्षा की।

अंदर जाने पर एक छोटा ऊंची छत वाला गोल कमरा है, जिसके मध्य में क्लाउड मार्टिन का पुतला है। चारों तरफ दीवारों पर क्रांति के दौरान योगदान देने वाले सैनिकों की सूची है।

यहीं पर क्लाउड मार्टिन जी को मृत्यु के बाद दफनाया गया। पास के लेख बताते है कि उनकी मृत्यु लखनऊ के ही एक इमारत फरहत बख्श कोठी में हुई। इनकी इच्छा थी कि यहां पर उनको दफनाया जाए।

चमकीला चर्च

इस हिस्से ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया। वैसे तो यह सामान्य चर्च की तरह है, लेकिन जब मैंने इसपर बनी छोटी और जटिल आकृतियां देखी तो मेरा मुंह खुला का खुला रह गया। ।

आकर्षक डिजाइन के साथ साथ आसमानी नीले और पीले रंग का संयोजन वाकई में इसकी सुंदरता में वृद्धि कर देता हैं। यह सिर्फ दीवारों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सर उठा कर देखने पर समान संयोजन आपको छत पर भी देखने को मिलेगी। 

विशाल घंटा और तोप

कुछ के निकास द्वार पर दो चीज़े आपका ध्यान खीचेंगी, एक विशाल घंटा है, जिस पर क्लाउड मार्टिन का नाम दर्ज है और दूसरा एक बड़ी सी तोप। यह तोप अंग्रेजो द्वारा श्रीरंगपटनम के युद्ध में टीपू सुलतान के खिलाफ प्रयोग की गई थी। बाद में इसको वापस लौटा दिया गया था।

विशाल घंटा

फिल्मों की हुए है शूटिंग

इस कैंपस में कई बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग भी हुई है, जैसे गदर- एक प्रेम कथा, अनवर, आलवेज कभी कभी आदि। इसकी खूबसूरती के दीवानों में कई अभिनेता और अभिनेत्री भी शामिल हैं।

इसके बारे में चौंकाने वाले तथ्य …

• ला मार्टिनियर ग्रुप (लखनऊ) से प्रियंका चोपड़ा, के रघुनाथ, मुज़फ्फर अली आदि जैसी कई प्रसिद्ध हस्तियों ने शिक्षा ली है।

• जनरल क्लाउड मार्टिन की इच्छा के बाद, ला मार्टिनियर कोलकाता, भारत और ल्योन, फ्रांस (क्लाउड मार्टिन का जन्मस्थान) में भी बनाया गया है।

• कॉन्सटेंटिया, ला मार्टिनियर के परिसर का नाम क्लाउड मार्टिन के पहले प्यार के नाम पर रखा गया था, जिनका नाम कॉन्स्टेंस था। भारत में आने से पहले मार्टिन ने इनको फ्रांस में छोड़ दिया था। विडंबना यह है कि यह भी माना जाता है कि नाम को स्कूल के आदर्श वाक्य Labore et Constantia (कार्य और निरंतरता, मार्टिन के व्यक्तिगत दर्शन का प्रतिनिधित्व) द्वारा संरेखित किया गया था और इसलिए इसका नाम रखा गया।

• ला मार्टिनियर बॉयज कॉलेज दुनिया का एकमात्र स्कूल है जिसे 1857 के विद्रोह के दौरान लखनऊ की रक्षा में अपनी भूमिका के लिए रॉयल बैटल ऑनर्स से सम्मानित किया गया है।

• ला मार्टिनियर लड़के के कॉलेज की स्थापना के आसपास मार्टिनपुरवा के नाम से जाना जाने वाला एक गाँव भी है।

• हर साल 13 सितंबर को क्लाउड मार्टिन के जन्मदिवस पर ” संस्थापक दिवस “ के रूप में मनाया जाता है।

• चूंकि यह विद्यालय 1 अक्टूबर 1945 में शुरू किया गया, इसलिए हर साल 1 अक्टूबर को ” कॉन्सटेंटिया दिवस “ मनाया जाता है।

कुछ सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रवेश शुल्क कितना है?

यहां घूमने के लिए प्रवेश निःशुल्क है। बस आपको गेट पर अपना नाम दर्ज करवा के बताना होगा कि आप टूरिस्ट है।

घूमने का सही समय क्या है?

आप यहां सुबह 10 से शाम 5 बजे तक घूम सकते हैं।

क्या स्कूल समय पर सभी मुख्य स्थानों का भ्रमण कर सकते हैं?

हां बिल्कुल। आप बेझिझक कर सकते हैं।

क्या कैमरा ले जा सकते हैं?

हां बिल्कुल। 

गाइड की सुविधा है?

स्कूल परिसर में कोई गाइड नहीं है। आप किसी टूर कंपनी का पैकेज लेंगे तो गाइड आपको हर चीज का विस्तारपूर्वक वर्णन करेगा। आप चाहें तो हमसे भी संपर्क कर सकते हैं।

यह स्कूल किस शिक्षा बोर्ड से है?

यह स्कूल सीबीएसई और आईएससी बोर्ड से है। 

कैसे पहुंचे?

दिल्ली से लखनऊ की दूरी 500 किमी है। यहां पहुंचने के लिए आप ट्रेन, बस और हवाई जहाज का सहारा ले सकते हैं। यहां पहुंचना वाकई बहुत आसान है। सिटी सेंटर हजरतगंज से लगभग 3 किमी दूर है। लखनऊ में उबर और ओला जैसी निजी कैब सेवाओं की भी पूरी मौजूदगी है। इसके अलावा, स्थानीय ऑटो-रिक्शा, सिटी बस भी उपलब्ध हैं।

हमारा अनुभव

हम अपने स्कूटर के माध्यम से वास्तुकला के इस अद्भुत भवन पर गए। लखनऊ के निवासी होने के नाते, सड़कें हमारे लिए बहुत अच्छी तरह से परिचित थीं। हम लगभग 12:00 बजे तक पहुँच गए। अगले दिन गणतंत्र दिवस था, इसलिए स्कूली बच्चे अगले दिन होने वाली परेड का अभ्यास कर रहे थे। 

कॉन्स्टेंटिया में प्रवेश करते हुए, हम परिसर की सफाई और हरे-भरे वातावरण को देखकर चकित थे। मुख्य भवन गेट से 5-10 मिनट की पैदल दूरी पर है। जब हम वहाँ पहुँचे, तो हम इतनी विशाल और पूरी तरह से सुसज्जित वास्तुकला को देखकर हैरान रह गए। यह ‘फ्रांस’ में होने जैसी भावना थी। यह इतिहास और वास्तुकला था।

बहुत सारे चित्र क्लिक करने के बाद, हमने एक लड़के से बात की जो एक बोर्डर था। उन्होंने हमें बताया कि वह उत्तर प्रदेश के सीतापुर के रहने वाले थे और अपनी पहली कक्षा से ला मार्टिनियर में अध्ययन कर रहे थे।

यदि आप लखनऊ के रहने वाले है या लखनऊ घूमने की योजना बना रहे हैं तो यह इमारत आपकी भ्रमण सूची में अवश्य होना चाहिए। अगर आप कोई सवाल या सुझाव देना चाहते है तो आपका स्वागत है।

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  1. लखनऊ का कम बहुचर्चित छत्तर मंजिल और फरहत बख्श कोठी - मिसफिट वांडरर्स

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