धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की सम्पूर्ण यात्रा निर्देशिका

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।

मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय।।

भगवदगीता

क्या आप जानते हैं कि कुरुक्षेत्र के पास सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेष हैं – वह भूमि जहां महाभारत का युद्ध हुआ था?

भारत में शायद ही कोई होगा जिसने कुरुक्षेत्र का नाम ना सुना हो। बचपन से ही हम रामायण की तरह महाभारत, कुरुक्षेत्र युद्ध और भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिए गए ग्रंथ भगवदगीता के उपदेशों को सुनते चले आ रहे हैं। 

इस लेख में कुरुक्षेत्र में घूमने की जगहें, स्थानीय व्यंजन, स्मृति चिन्ह, एक्टिविटीज, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, आवास, यात्रा युक्तियां आदि सभी महत्वपूर्ण चीजों को बताया गया है। इसे एक आदर्श यात्रा निर्देशिका कहना बिल्कुल सही होगा।

तो बिना समय गवाएं, चलिए आगे बढ़ते हैं।



सूचना: इस पोस्ट में कुछ लिंक हो सकते हैं। जब आप उनके माध्यम से कुछ खरीदते हैं या कोई बुकिंग करते हैं तो हमें वित्तीय सहायता मिलती हैं। वे किसी भी तरह से हमारी राय या यहां प्रस्तुत जानकारी को प्रभावित नहीं करते हैं।

कुरुक्षेत्र वीडियो टूर

कुरुक्षेत्र में घूमने की टॉप 6 जगहें

कुरुक्षेत्रम गमिष्यामि कुरुक्षेत्रे वसाम्य्हम।

य एवं सततं ब्रूयात सर्वपापैः प्रमुच्यते।।

1. श्री कृष्ण संग्रहालय

महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण ने एक अहम भूमिका निभाई थी। यह दुनिया का एकमात्र संग्रहालय है जो पूर्ण रूप से बस भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इसकी स्थापना सन् 1987 में हुई और इसमें लगातार नए ब्लॉक जोड़े जाते गए। 

वर्तमान संग्रहालय में कुल 9 गैलरी है जिनमे कुरुक्षेत्र, हरियाणा, द्वारका, मथुरा के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों से प्राप्त पुरातात्विक कलाकृतियों को संजोकर रखा गया है।

कुरुक्षेत्र का कृष्ण संग्रहालय
श्री कृष्ण संग्रहालय का प्रवेश

इन गैलरी में भगवान कृष्ण से संबंधित लकड़ी की नक्काशी, हाथी दांत के काम, धातु निर्मित कलाकृतियां, शिलालेख, चित्रकला, लघु चित्र आदि को प्रदर्शित किया गया है।

कृष्ण संग्रहालय का एक दृश्य

एक अन्य गैलरी में श्रीकृष्ण के जीवनकाल और महाभारत को दर्शाया गया है। यह संग्रहालय का मुख्य आकर्षण है। इसके अलावा यहां सालभर वर्कशॉप, प्रदर्शनी, और प्रतियोगिताओं का आयोजन होता रहता है।

खुलने का समय: सुबह 10 बजे से शाम 4:15 बजे तक (सोमवार को बंद)

टिकट दर: वयस्कों के लिए ₹30, बच्चों के लिए ₹10

सुविधाएं: पब्लिक टॉयलेट, टूर गाइड, कैंटीन, फोटोग्राफी की अनुमति आदि।

2. ब्रह्म सरोवर

कुरुक्षेत्र में सबसे ज्यादा घूमे जाना वाला ब्रह्म सरोवर एशिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित सरोवर है। इस सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा के नाम पर इस सरोवर का नाम पड़ा। ऐसा इसलिए क्योंकि कहा जाता है कि यह सरोवर ठीक उसी स्थान पर है जहां ब्रह्मा जी ने अपना पहला यज्ञ किया था। 

कुरुक्षेत्र के ब्रह्म सरोवर के बीच स्थित मंदिर
ब्रह्म सरोवर के बीच स्थित मंदिर

स्थानीय मान्यताओं की माने तो इसका जीर्णोद्धार सबसे पहले राजा कुरु ने करवाया। आपको बताते चले कि राजा कुरु के नाम पर ही इस इलाके का नाम कुरुक्षेत्र पड़ा। ये पांडवों और कौरवों के पूर्वज थे। सूर्य ग्रहण के दिन इसमें स्नान करने का फल सौ अश्वमेध यज्ञों के बराबर है। 

लगभग 4 किलोमीटर की परिधि ने फैले इस सरोवर के बीच में सर्वेश्वर महादेव मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। इसके एक तरफ श्रीकृष्ण अर्जुन रथ है। 35 टन के भार वाला कांस्य से निर्मित यह विराट प्रतिमा भव्य लगती है। इसमें श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को उपदेश देते हुए दर्शाया गया है।

श्रीकृष्ण अर्जुन रथ

यहां हर वर्ष नवंबर – दिसंबर के महीने में गीता जयंती समारोह या अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन बड़े पैमाने पर किया जाता है, जिसमे भाग लेने देशभर से श्रद्धालु आते हैं।

3. कुरुक्षेत्र पैनोरमा और विज्ञान केंद्र

श्रीकृष्ण संग्रहालय परिसर में ही स्थित यह विज्ञान केंद्र महाभारत में घटित हुए प्रसंगों पर आधारित गाथाओं को जीवंत करता है। इसका बेलनाकार भवन आकर्षित करता है। यह एक ऐसी जगह है जहां विज्ञान और धर्म का अनोठा संयोजन दिखाया गया है। 

गीतापाठ और महाभारत युद्ध की चीख पुकार उस समय की हुई घटनाओं का जीवंत चित्रण करता है। सम्पूर्ण महाभारत युद्ध के दौरान घटित हुई घटनाओं का वैज्ञानिक व्याख्यान करते हुए उनका महत्व बताया गया है।

कुरुक्षेत्र पैनोरमा और विज्ञान केंद्र

यहां भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, पदार्थों के गुणों, परमाणु की संरचना, ज्यामिति, खगोल शास्त्र, शल्य चिकित्सा के प्राचीन भारतीय अवधारणाओं आदि से संबंधित प्रदर्शनी दिखाई गई है।

इसके अलावा यहां कई तरह के लाइव शो का आयोजन होता है। बच्चों के लिए यह एक आदर्श स्थान है जहां वे खेल-खेल में बहुत कुछ सीख सकते हैं। 

खुलने का समय: सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक (सोमवार को बंद)

टिकट दर:

  • व्यस्कों के लिए ₹35 और विद्यार्थियों के लिए ₹10
  • 3D फिल्म शो के लिए ₹20
  • तारामंडल शो के लिए ₹10

4. शेख चिल्ली का मकबरा और राजा हर्ष का टीला

आपने अक्सर शेख चिल्ली के लतीफों के बारे में सुना होगा। आपको बता दें कि शेख चिल्ली (शेख चहेली), या अब्दुल रहीम (अब्दुल रज्जाक) एक सूफी संत थे। यह मकबरा उन्ही का है।

मुगल बादशाह शाहजहां (जिन्होंने ताज महल बनवाया) के बड़े बेटे दारा शिकोह ने इसका निर्माण 17वीं शताब्दी में करवाया था।

शेख चिल्ली का मकबरा

लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से निर्मित इस मकबरे का परिसर पहली नजर में भी आंखों को भाने लगता है। परिसर में एक मस्जिद, मदरसा के साथ साथ एक संग्रहालय भी है जो भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। 

इसके पीछे 1.5 किमी की परिधि में फैला राजा का टीला है। यहां कुषाण काल से लेकर मुगल काल तक के संस्कृति के अवशेष प्राप्त हुए है। संग्रहालय में इन्हीं अवशेषों को संग्रहित किया गया है।

खुलने का समय: सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक।

टिकट दर: भारतीय पर्यटकों के लिए ₹25 और विदेशी पर्यटकों के लिए ₹100

5. स्थानेश्वर महादेव मंदिर

शेख चिल्ली मकबरे से कुछ मीटर की दूरी पर स्थानेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर के नाम पर इस इलाके को थानेसर बोलते हैं। प्राचीन मान्यताओं की माने तो यहां पर शिवलिंग की स्थापना स्वयं भगवान ब्रह्मा ने किया था।

स्थानेश्वर महादेव मंदिर

इसकी एक मान्यता यह भी है कि महाभारत युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के साथ मिलकर यहां स्थित शिवलिंग की पूजा अर्चना की और महाभारत में विजयी होने के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया।

वर्तमान मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार पानीपत के तृतीय युद्ध के बाद मराठा सेनापति सदाशिव राव द्वारा करवाया गया था।

मंदिर के सामने एक कुंड भी है। सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर जी ने भी इस स्थान का भ्रमण किया और कुछ दिन व्यतीत किया था।

6. श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर

सम्पूर्ण भारत में फैले देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ यहां कुरुक्षेत्र में स्थित है। इसको सावित्री पीठ, देवी पीठ या कालिका पीठ के नाम से भी जाना जाता है।

जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से देवी सती के मृत शरीर को 52 हिस्सा में काटा तो उनका दायां टखना यहां स्थित एक कुएं में गिरा। अतः इसे देवीकूप बोला जाता है। 

भद्रकाली मंदिर का प्रवेश

भगवान श्रीकृष्ण और पांडवों ने युद्ध के दौरान यहां लगातार माता की आराधना की और अपने घोड़ों का दान किया। तभी से यहां मिट्टी या धातु के घोड़ों का दान का चलन प्रारंभ हो गया।

श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर

आज भी लोग मनोकामना पूर्ण होने पर दान करते है। मंदिर के अभिलेखों से मालूम होता है कि भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी का मुंडन भी इसी जगह पर हुआ था।

नवरात्रि में भक्तों का हुजूम देखते ही बनता है। इसके अलावा भी रोज सैकड़ों लोग मंदिर के दर्शन करते है। इसके परिसर में “I LOVE KURUKSHETRA” नामक चिन्ह मुख्य आकर्षण हैं।

कुरुक्षेत्र में कुछ अन्य घूमने की जगहें

गीतासर

गीतासर वह पवित्र स्थान है जहां भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता उपदेश दिया गया था। यह कुरुक्षेत्र से 7 किमी की दूरी पर है और इसी स्थान से महाभारत का युद्ध प्रारंभ हुआ था। आदिगुरु शंकराचार्य जी ने अपने हिमालय यात्रा के दौरान इस जगह को खोज की थी।

सन्निहित सरोवर

यह एक अन्य सरोवर है जो पूजनीय है। सन्निहीत का अर्थ है जहां सब कुछ निहित (एकत्र) होता है, अतः ऐसी मान्यता है कि अमावस्या के दिन पृथ्वी के सभी पवित्र सरोवरों का जल यह इकठ्ठा हो जाता है।

इसमें नहाना बहुत ही फलदाई माना गया है। वृतासुर नामक दैत्य को मारने के लिए इसी स्थान पर महर्षि दधीचि जी ने अस्थिदान किया था।

भीष्म कुंड

जब भीष्म पितामह बाणों की शैय्या पर लेटे हुए थे, तो उन्होंने जल ग्रहण करने का इच्छा व्यक्त की। अर्जुन ने उनकी इच्छा जानकर धरती में बाण चलाया जहां से जलधारा फूट पड़ी और यह कुंड आज उसी जगह पर स्थित है। इसी स्थान पर युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से राजधर्म और अनुशासन की दीक्षा ली।

धरोहर संग्रहालय

हरियाणा राज्य की स्थानीय संस्कृति, और समृद्ध ऐतिहासिक परंपराओं को जनमानस तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने धरोहर की स्थापना की। सन् 2006 में इसको कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित किया गया। इसमें कला, शिल्प, परिधान, अस्त्र शस्त्र, कलाकृतियां, और पांडुलिपियां संग्रहित हैं।

कुरुक्षेत्र के स्थानीय पकवान

हरियाणा का अभिन्न अंग होने के कारण आपको कुरुक्षेत्र में मुख्य रूप से हरियाणवी पारंपरिक पकवान ही देखने को मिलते है। पंजाब के निकट होने के कारण रोटी, साग और लस्सी का भी चलन देखा जा सकता है। कुरुक्षेत्र में भोजन करने के स्थानों के बारे में जानने के लिए नीचे की तालिका देखें:

पकवान कहाँ चखें 
स्वादिष्ट छोले भटूरे रेलवे स्टेशन के निकट 
छोला पूड़ी के साथ पेठा पुराने शहर (अंबेडकर चौक के पास)
बैगन का भरता और पराठा, स्नैक्स श्रीकृष्ण संग्रहालय परिसर 
बाजरे की रोटी और खिचड़ी, लस्सी, मालपुआ, बथुआ रायता रोटी, कचरी की सब्जी आदि किसी भी स्थानीय ढाबे और रेस्टॉरेंट पर 
चाट, फुलकी और पकोड़े ब्रह्म सरोवर के निकट ठेलों पर
अन्य नार्थ या साउथ इंडियन पकवान मेजबान रेस्टॉरेंट

कुरुक्षेत्र में क्या करें?

1. ब्रह्म सरोवर में शांति का अनुभव करें

एक बड़े हिस्से में फैला हुआ ब्रह्म सरोवर की बैंचों पर बैठकर सरोवर को निहारना एक अलग ही आनंद की अनुभूति प्रदान करता है। आप चाहे तो इसमें स्नान भी कर सकते है या आसपास के साधु संतों से इस स्थान से जुड़ी गाथाओं की सुन सकते हैं। अंत में विशाल श्रीकृष्ण अर्जुन रथ का अवलोकन कर सकते हैं।

2. मुगल वास्तुकला की प्रशंसा करें

ऐसे हिंदू धर्म के महत्व वाले स्थान पर एक मुगल काल में निर्मित वास्तुशिल्प का सही अवस्था में होना चकित करता है। असल मायनों में यही तो हमारे देश की खूबसूरती है। अगर आप मुगल वास्तुकला के दीवाने है तो आप यहां कुछ अच्छा समय बिताने के साथ बेहतरीन तस्वीरें खींच सकते हैं।

3. कुरुक्षेत्र विज्ञान केंद्र में महाभारत को जीवंत देखें

श्रीकृष्ण संग्रहालय के निकट स्थित कुरुक्षेत्र पैनोरमा और विज्ञान केंद्र के लाइव शो में महाभारत और गीता उपदेश का जीवंत चित्रण देखें। यह आपके बौद्धिक और मानसिक विकास में सहायक होगा।

4. 48 कोस कुरुक्षेत्र परिक्रमा करें

कुरुक्षेत्र के 15 तीर्थ स्थलों के दर्शन के लिए राज्य सरकार रोज सुबह 9 और 10 बजे से सरकारी बस का संचालन करता है। यह महज ₹50 में सभी स्थलों के दर्शन करवाता है। इसके लिए आपको स्थानीय बस अड्डे पर संपर्क करना होगा।

5. गीता महोत्सव में शामिल हो

आप यहां आयोजित होने वाले गीता जयंती समारोह या अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में भी हिस्सा ले सकते हैं। इसका आयोजन नवंबर या दिसंबर महीने में होता है। इसमें दीप प्रज्वलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी, गीता सेमिनार आदि आयोजित किया जाता है। 

क्या स्मृति चिन्ह खरीदें?

अगर आप कला प्रेमी हैं तो यह शहर आपको एक विशिष्ट अनुभव प्रदान करेगा। नीचे इन सभी चीजों को सूची है जिन्हे आपको कुरुक्षेत्र में खरीदना चाहिए।

हस्तकरघा (हैंडलूम) से जुड़ी वस्तुएं

हैंडलूम की चीजें जैसे बुने हुए शॉल, रोब्स, लुंगी, फुलकरी स्टाइल की वस्तुएं, बैग, पर्स, झोला, छाता आदि खरीद सकते हैं। ये सब चीजें ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों द्वारा बनाया जाता है। तो ये खरीदकर आप लोकल फॉर वोकल में अपना योगदान दे सकते हैं।

मिट्टी (पॉटरी) की चीजें

इन वस्तुओं का उत्पादन मूल रूप से कुरुक्षेत्र के ग्रामीण कुटीर उद्योगों में किया जाता है। आप पारंपरिक वस्तुएं जैसे बर्तन, फूलदान, खिलौने, सजावटी सामान, आदि ले सकते हैं। इनके कलात्मक डिजाइन और निर्माण स्तर अत्यंत प्रशंसनीय हैं।

पूजा और श्रीकृष्ण से जुड़ी वस्तुएं

गीता उपदेश और महाभारत युद्ध से जुड़े होने के कारण आप यहां धार्मिक चीजें खरीद सकते हैं। इनमे पूजा की थाली, घंटी, हर आकार की मूर्तियां, धातु से बनी चीजें, भगवतगीता और गीता उपदेश की पुस्तकें, काष्ठ कला की वस्तुएं आदि प्रमुख हैं।

कहां खरीदें

सेक्टर 17, रेलवे रोड मार्केट, ओल्ड सिटी मार्केट, श्रीकृष्ण मार्केट, तुलाराम मार्केट, शास्त्री मार्केट आदि कुछ मुख्य मार्केट हैं। इसके अलावा आप सभी पर्यटन स्थलों के निकट भी खरीददारी कर सकते हैं।

कृष्ण संग्रहालय में रखीं हुई कलाकृतियां

पब्लिक टॉयलेट और स्वच्छता

सभी पर्यटन स्थलों के परिसरों की साफ सफाई ने वाकई में मुझे चौका दिया। भले कोई मंदिर हो, या मकबरा, संग्रहालय हो या सरोवर, सभी जगहों पर पब्लिक टॉयलेट उपलब्ध है और सफाई का विशेष ध्यान दिया गया है।

तो, निश्चित रहिए आपको इस विभाग में किसी तरह की शिकायत करने का मौका नहीं मिलेगा।

आकर्षणों के बीच परिवहन का तरीका

सभी मुख्य आकर्षण थानेसर नामक इलाके में आते हैं। कुरुक्षेत्र बस अड्डे से ब्रह्म सरोवर की दूरी 6 किमी मात्र है। हम ब्रह्म सरोवर को एक केंद्र बिंदु मान सकते हैं जिसके 5 किमी की परिधि में सभी अन्य आकर्षण स्थित हैं। 

सभी जगहों के लिए ऑटो और बैटरी वाले रिक्शे संचालित किए जाते हैं। तो आपको किसी भी स्थान पर पहुंचने में दिक्कत नहीं होगी। अगर आप चाहें तो पैदल भी इन स्थानों का भ्रमण कर रहे। बस ज्योतिसर कुछ दूरी पर है।

कुरुक्षेत्र घूमने का सही समय

कुरुक्षेत्र की यात्रा के लिए सितंबर से मार्च का समय आदर्श है क्योंकि इस महीनों में मौसम सुहावना होता है। इन मौसम में हल्के ऊनी कपड़े अवश्य लाएं। ग्रीष्मकाल और मानसून यहाँ बहुत गर्म और आर्द्र होते हैं जो इसको थोड़ा दुर्लभ बनाते हैं। 

जानकारी के लिए बता दें कि नवंबर या दिसंबर में गीता जयंती महोत्सव का भी आयोजन होता है। तो अगर आप इस समय जाएं तो कुछ अलग अनुभव होगा।

दिनो की संख्या और बजट

दिनो की संख्या

अगर आप शहर के सभी पर्यटन स्थलों को गहराई से जानना और समझना चाहते हैं तो आपको कम से कम दो दिन की आवश्यकता होगी।

यदि आप चंडीगढ़ या दिल्ली से सुबह जल्दी पहुंचते हैं तो शाम तक सभी जगहों को घूम सकते हैं।

बजट

सभी के लिए बजट अलग-अलग हो सकता है। यह प्रायः इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन सा होटल लेते है, क्या खाते पीते है और क्या खरीददारी करते हैं। फिर भी एक सामान्य बजट निम्नवत है:

  • एक दिन के लिए: ₹2000
  • दो दिन के लिए: ₹3000

कुरुक्षेत्र कैसे पहुंचें?

रेल द्वारा

कुरुक्षेत्र का निकटतम रेलवे स्टेशन कुरुक्षेत्र जंक्शन (3 किमी) है। इस रेलवे स्टेशन से दिल्ली, अंबाला, और चंडीगढ़ के लिए कई ट्रेनें उपलब्ध है।

रोड द्वारा

कुरुक्षेत्र ग्रांड ट्रंक रोड पर स्थित पीपली से 6 किमी की दूरी पर है। यह रोड दिल्ली से चंडीगढ़ को जोड़ता है। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, और चंडीगढ़ रोड ट्रांसपोर्ट की बसें रोजाना दिल्ली और से संचालित होती है। मुख्य बस स्टैंड पीपली जबकि स्थानीय बस स्टैंड कुरुक्षेत्र है।

हवाई मार्ग द्वारा

कुरुक्षेत्र का निकटम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा चंडीगढ़ (90 किमी) और दिल्ली (170 किमी) है। देश के सभी हिस्सों से यहां के लिए डोमेस्टिक फ्लाइट संचालित की जाती हैं।

कहां रुकें?

सस्ते धर्मशाला से लेकर महंगे 3 सितारा होटल तक के विकल्प यहां मौजूद हैं। आप अपनी सुविधा और बजट के अनुसार होटल का चयन कर सकते हैं।

ब्रह्म सरोवर के निकट कई धर्मशाला हैं जहां ₹500 से ₹1000 तक कमरे उपलब्ध हैं। वहीं अच्छे आवास के रूप में परकीत, होटल पर्ल, हेरिटेज होटल और नीलकंठी निवास उपलब्ध हैं।

सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कुरुक्षेत्र की क्या विशेषता है?

कुरुक्षेत्र वह स्थान है जहां महाभारत के युद्ध कौरवों और पांडवों के बीच हुआ था। इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता उपदेश दिया था।

2. कुरुक्षेत्र को और किस नाम से जानते हैं?

कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र, महाभारत की भूमि, और गीता उपदेश की जनस्थली भी बोला जाता है।

3. कुरुक्षेत्र युद्ध स्थान कहां है?

कुरुक्षेत्र युद्ध स्थान देश की राजधनी दिल्ली से 150 किमी की दूरी पर स्थित है।

4. कुरुक्षेत्र को महाभारत युद्ध के लिए क्यों चुना गया था?

भगवान कृष्ण महाभारत युद्ध के माध्यम से पृथ्वी पर बढ़ते पापों को मिटाना चाहते थे और धर्म की स्थापना करना चाहते थे। इसलिए युद्ध क्षेत्र के रेप में कुरुक्षेत्र को चुना गया। ऐसा भी मान्यता है कि कुरुक्षेत्र को वरदान प्राप्त था कि जो यहां मरेगा वो स्वर्गलोग जाएगा।

5. कुरुक्षेत्र की लड़ाई क्यों लड़ी गयी?

जमीन और अधिकार की वजह से कौरवों और पांडवों में कुरुक्षेत्र की लड़ाई लड़ी गयी। साथ ही इस युद्ध के साथ भगवान कृष्ण ने धर्म की स्थापना की।


समापन

कृष्ण संग्रहालय मेलड़की पर उकेरे हुए कृष्ण

यह कुरुक्षेत्र के पावन धरती से जुड़ी हमारी यात्रा निर्देशिका है। उम्मीद है इसमें कुरुक्षेत्र से जुड़ी हर एक छोटी से छोटी जानकारी को साझा करने में सफल रहे हैं।

फिर भी यदि आपके कोई सुझाव या सवाल हैं, तो आप बेझिझक नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार व्यक्त करें। हम आपके सुझावों से खुद को और बेहतर बनाने का प्रयत्न करेंगे।


एक अपील: कृपया कूड़े को इधर-उधर न फेंके। डस्टबिन का उपयोग करें और यदि आपको डस्टबिन नहीं मिल रहा है, तो कचरे को अपने साथ ले जाएं और जहां कूड़ेदान दिखाई दे, वहां फेंक दें। आपकी छोटी सी पहल भारत और दुनिया को स्वच्छ और हरा-भरा बना सकता है।

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Abhishek Singh

मैं अभिषेक सिंह नवाबों के शहर लखनऊ से हूं। मैं एक कंटेंट राइटर के साथ-साथ डिजिटल मार्केटर भी हूं | मुझे खाना उतना ही पसंद है जितना मुझे यात्रा करना पसंद है। वर्तमान में, मैं अपने देश, भारत की विविध संस्कृति और विरासत की खोज कर रहा हूं। अपने खाली समय में, मैं नेटफ्लिक्स देखता हूं, किताबें पढ़ता हूं, कविताएं लिखता हूं, और खाना बनाता हूँ। मैं अपने यात्रा ब्लॉग मिसफिट वांडरर्स में अपने अनुभवों और सीखों को साझा करता हूं।

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